जनप्रतिनिधियों के लंबित मामले: हाई कोर्ट ने सुनाई सख्ती, रिपोर्ट तलब
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य के जनप्रतिनिधियों से जुड़े लंबित आपराधिक मामलों के निपटारे में हो रही धीमी गति पर चिंता जताई है। कोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए सभी जिला अदालतों से मामले की अद्यतन स्थिति रिपोर्ट मांगी है। न्याय मित्र डॉ. एनके शुक्ला ने कोर्ट को बताया कि पिछली रिपोर्ट की तुलना में दो मामले कम हुए हैं, लेकिन यह प्रगति संतोषजनक नहीं है।
हाई कोर्ट ने सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को निर्देश दिया है कि वे 25 अगस्त 2024 को अगली सुनवाई से पहले अपने-अपने जिलों में जनप्रतिनिधियों से जुड़े लंबित आपराधिक मामलों की विस्तृत और नवीनतम रिपोर्ट पेश करें। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि इस आदेश की प्रति तत्काल सभी निचली अदालतों को भेजी जाए, ताकि मामलों के त्वरित निराकरण की दिशा में कदम उठाए जा सकें।
रिपोर्ट के अनुसार, बिलासपुर जिले में विधायक अटल श्रीवास्तव, बलौदाबाजार में विधायक देवेंद्र यादव और पूर्व विधायक प्रमोद शर्मा, जांजगीर-चांपा में विधायक बालेश्वर साहू, कबीरधाम में पूर्व विधायक अशोक कुमार साहू, रायपुर में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, देवेंद्र यादव, कवासी लखमा सहित कई अन्य नेता विभिन्न अदालतों में आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं। राजधानी रायपुर की विशेष अदालतों में पीएमएलए, ईडी और सीबीआई से जुड़े मामले भी विचाराधीन हैं।
राजनांदगांव जिले में पूर्व सांसद मधुसूदन यादव के कुछ मामलों में हाई कोर्ट के स्थगन आदेश लागू हैं, जबकि अन्य मामलों में आरोपियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। गरियाबंद जिले में भी कई जनप्रतिनिधियों के आपराधिक मामले विभिन्न अदालतों में विचाराधीन हैं। हाई कोर्ट की इस सख्ती से उम्मीद है कि जनप्रतिनिधियों के लंबित मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी और न्याय प्रक्रिया को बल मिलेगा।
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