हसदेव आरती: नदी संरक्षण का संकल्प, माँ सर्वमंगला घाट पर छाया आस्था का संगम

कोरबा: छत्तीसगढ़ की जीवनदायिनी हसदेव नदी के संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जनमानस में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर माँ सर्वमंगला मंदिर घाट पर एक भव्य हसदेव आरती का आयोजन किया गया। नमामि हसदेव सेवा समिति द्वारा आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में नदी, उसकी सहायक नदियों और अन्य प्राकृतिक जल स्रोतों को स्वच्छ एवं प्रदूषण मुक्त रखने का सामूहिक संकल्प लिया गया।
गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर, 29 जुलाई 2026, बुधवार को शाम 5 बजे माँ सर्वमंगला मंदिर घाट पर आयोजित इस आरती का मुख्य उद्देश्य हसदेव नदी और प्रदेश के अमूल्य जल स्रोतों के संरक्षण के प्रति जनसहभागिता को बढ़ाना रहा। समिति ने इस आयोजन के माध्यम से लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति अधिक संवेदनशील बनाने और नदी तटों की स्वच्छता बनाए रखने का संदेश दिया। यह मासिक हसदेव आरती अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य हर पूर्णिमा को आस्था के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना को भी मजबूत करना है।
कार्यक्रम में हसदेव नदी के धार्मिक, सामाजिक और पर्यावरणीय महत्व पर प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने आह्वान किया कि नदियां केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि जीवनदायिनी हैं और इनके संरक्षण में समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। समिति का मानना है कि हसदेव नदी को स्वच्छ बनाए रखना और उसके आस-पास के जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
इस विशेष आरती में मुख्य यजमान के रूप में डॉ. किरण चौहान, प्राचार्य, ज्योति भूषण प्रताप सिंह विधि महाविद्यालय, कोरबा उपस्थित रहे। वहीं, विशिष्ट यजमानों में श्री राजकुमार देवांगन, प्राचार्य, सरस्वती उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सी.एस.ई.बी., कोरबा पूर्व; श्रीमती इंदु अग्रवाल, प्राचार्य, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, कोरबा; श्री नरसिंह शास्त्री, व्याख्याता, दयानंद एंग्लो वैदिक विद्यालय, एस.ई.सी.एल., कोरबा; तथा श्रीमती सविता पाठक, व्याख्याता, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय साडा कन्या, कोरबा ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।
नमामि हसदेव सेवा समिति विगत लंबे समय से हसदेव नदी और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रयासरत है। गुरु पूर्णिमा पर आयोजित यह हसदेव आरती, धार्मिक आस्था को पर्यावरण संरक्षण के संकल्प से जोड़कर, लोगों को अपनी जल संपदा के प्रति अधिक जिम्मेदार बनने के लिए प्रेरित करने का एक सफल प्रयास रहा।
टिप्पणियाँ (Comments)
सुरक्षा कारणों से इस लेख पर टिप्पणियाँ वर्तमान में बंद हैं।
Comments are disabled for this article.

