गेवरा क्षेत्र के पुनर्प्रयोजन पर कलेक्टर की अध्यक्षता में हितधारकों की बैठक

कोरबा: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में गेवरा कोयला खनन क्षेत्र के भविष्य को सुरक्षित एवं समृद्ध बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण हितधारक बैठक का आयोजन किया गया। माइंनिग प्लान व माइन क्लोजर एडवाइजरी कमेटी के चेयरमैन एवं कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित इस बैठक में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के जस्ट ट्रांजिशन रिसर्च सेंटर (जेटीआरसी) द्वारा गेवरा क्षेत्र के सतत पुनर्प्रयोजन विषय पर गहन चर्चा हुई।
बैठक में खनन गतिविधियों में होने वाले क्रमिक परिवर्तन के परिप्रेक्ष्य में गेवरा क्षेत्र के दीर्घकालिक सामाजिक, आर्थिक एवं पर्यावरणीय विकास की संभावनाओं पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) के वरिष्ठ अधिकारी, माइन क्लोजर एडवाइजरी कमेटी के सदस्य, जनप्रतिनिधि, ग्राम पंचायतों के सरपंच, पार्षद, विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा अन्य प्रमुख हितधारक उपस्थित रहे।
कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत ने इस अवसर पर कहा कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के भविष्य को सुरक्षित एवं समृद्ध बनाने के लिए स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप व्यवहारिक एवं दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पुनर्प्रयोजन की प्रक्रिया में शासन की विभिन्न योजनाओं, उपलब्ध नियामकीय एवं वित्तीय प्रावधानों तथा स्थानीय समुदाय की सहभागिता का प्रभावी समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि क्षेत्र में रोजगार, आजीविका और सतत विकास के नए अवसर सृजित हो सकें।
आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर प्रदीप स्वर्णकार ने वर्ष 2025 के अद्यतन माइन क्लोजर दिशानिर्देशों के अंतर्गत रीक्लेम फ्रेमवर्क (खनन उपरांत भूमि के पुनर्विकास एवं सतत उपयोग की रूपरेखा) की जानकारी साझा की। उन्होंने भविष्य की योजनाओं में स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी को अनिवार्य बताया। प्रोफेसर स्वर्णकार ने कहा कि खनन गतिविधियों की समाप्ति के बाद भी क्षेत्र सामाजिक, आर्थिक एवं पर्यावरणीय दृष्टि से सुदृढ़ बना रहे, इसके लिए स्थानीय लोगों की राय एवं अपेक्षाओं को योजना निर्माण का आधार बनाया जाना चाहिए। बैठक में युवाओं एवं महिलाओं के बहु-कौशल विकास को प्राथमिकता देने पर विशेष बल दिया गया, साथ ही तकनीकी विकास, कृषि, पर्यटन, पारिस्थितिकीय पुनर्स्थापन, आजीविका विविधीकरण, कौशल विकास तथा नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को प्रमुखता से शामिल करने पर सहमति बनी। प्राप्त सुझावों के आधार पर गेवरा क्षेत्र के लिए स्थानीय आवश्यकताओं एवं जन-अपेक्षाओं के अनुरूप दीर्घकालिक पुनर्प्रयोजन की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
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