बिलासपुर में 50 ई-बसें दौड़ेगीं, जनता तय करेगी रूट
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक राजधानी बिलासपुर अब जल्द ही इलेक्ट्रिक बसों की गूंज से गुलजार होगी। शहर के सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल और सुगम बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, प्रशासन ने 50 वातानुकूलित (एसी) ई-बसों के संचालन की योजना बनाई है। इन बसों का पहला चरण 35 बसों से शुरू होगा, जिसके बाद दूसरे चरण में 15 और बसें बेड़े में शामिल की जाएंगी। इस पहल से शहरवासियों को न केवल बेहतर, बल्कि सुरक्षित और प्रदूषण-मुक्त सफर का अनुभव मिलेगा।
ई-बसों के संचालन को जन-केंद्रित बनाने के लिए, बिलासपुर जिला अर्बन पब्लिक सर्विस सोसाइटी ने एक अनूठी पहल की है। शहर के आम नागरिकों, विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों और नियमित यात्रियों से बसों के संचालन मार्गों (रूट्स) को लेकर सुझाव मांगे गए हैं। प्रशासन का मानना है कि जिन मार्गों पर यात्रियों की संख्या अधिक है और लोगों की परिवहन संबंधी जरूरतें ज्यादा हैं, उन्हीं रूटों को प्राथमिकता दी जाएगी। यह निर्णय यह सुनिश्चित करेगा कि बस सेवा उन क्षेत्रों तक पहुंचे जहां इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है, जिससे सार्वजनिक परिवहन की उपयोगिता बढ़ेगी।
नागरिक अपनी राय ई-मेल (bdupssbilaspur@gmail.com) के माध्यम से भेज सकते हैं या फिर नगर निगम के विकास भवन स्थित अर्बन पब्लिक सर्विस सोसाइटी कार्यालय में सीधे जाकर भी अपने सुझाव जमा कर सकते हैं। प्रशासन द्वारा प्रारंभिक तौर पर छह प्रमुख मार्गों का प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिनमें शहर के मुख्य इलाकों के साथ-साथ आसपास के कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों को भी जोड़ा जाएगा। इन प्रस्तावित मार्गों में रेलवे स्टेशन से मल्हार, बिल्हा, रतनपुर, खूंटाघाट, लुतरा शरीफ, सीपत, कोटा और तखतपुर जैसे महत्वपूर्ण स्थलों को शामिल किया गया है, जो विभिन्न क्षेत्रों के यात्रियों को सुविधा प्रदान करेंगे।
ई-बसों के सुचारू संचालन के लिए कोनी क्षेत्र में लगभग 8 करोड़ रुपये की लागत से एक आधुनिक डिपो का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इस डिपो में 14 चार्जिंग प्वाइंट सहित बसों की पार्किंग, रखरखाव और चार्जिंग की सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। निर्माण का बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका है और इसे जल्द ही संचालन के लिए तैयार कर लिया जाएगा। उम्मीद है कि ई-बस सेवा के शुरू होने से बिलासपुर में सार्वजनिक परिवहन का विस्तार होगा और लोगों की निजी वाहनों पर निर्भरता कम होगी, जो शहर को जाम और प्रदूषण से निजात दिलाने में भी मददगार साबित होगा।
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