बस्तर का गौरव राष्ट्रपति भवन पहुंचा, जनजातीय संस्कृति की गूंज
नई दिल्ली: कभी नक्सल हिंसा की छाया में रहने वाला बस्तर, अब शांति, विकास और नई पहचान की ओर अग्रसर है। इस बदलते बस्तर की गौरवगाथा सुनाने के लिए 164 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल आज राष्ट्रपति भवन पहुंचा। यह प्रतिनिधिमंडल बस्तर के समाज प्रमुखों, कलाकारों और युवाओं का एक सशक्त समूह है, जो देश की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था के समक्ष अपने क्षेत्र की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और लोक कलाओं का प्रदर्शन करेगा।
प्रतिनिधिमंडल का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रपति को बस्तर के उस बदलते स्वरूप से अवगत कराना है, जहां कभी भय और हिंसा का माहौल था, वहीं आज शिक्षा, पर्यटन, रोजगार और जनजीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। शासन की विकास योजनाओं और सुरक्षा बलों के अथक प्रयासों से क्षेत्र में नई आशाओं का संचार हुआ है। सदस्य यह संदेश देंगे कि बस्तर के युवा अपनी संस्कृति, कला और प्रतिभा के बल पर राष्ट्रीय पटल पर एक नई पहचान बना रहे हैं।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने दिल्ली के लिए रवाना हो रहे इस महत्वपूर्ण प्रतिनिधिमंडल को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह बस्तर के गौरव को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का एक ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने कहा, "यह प्रतिनिधिमंडल केवल बस्तर का प्रतिनिधित्व नहीं कर रहा, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और गौरवशाली विरासत को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचा रहा है। राष्ट्रपति भवन तक बस्तर की लोकसंस्कृति, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों की गूंज पहुंचना प्रदेश के लिए गर्व का विषय है।"
यह यात्रा बस्तर की एक नई छवि प्रस्तुत करती है, जहां संस्कृति का संरक्षण करते हुए विकास और शांति को प्राथमिकता दी जा रही है। यह प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति के प्रति बस्तरवासियों की ओर से आभार व्यक्त करेगा और नक्सलवाद के खिलाफ जारी अभियान व क्षेत्र में हो रहे विकास कार्यों के लिए सहयोग पर भी प्रकाश डालेगा। यह बस्तर के युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने और क्षेत्र के सकारात्मक परिवर्तन को रेखांकित करने का एक महत्वपूर्ण कदम है।
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