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बस्तर पंडुम: सियासत गरमाई, कांग्रेस ने उठाए करोड़ों के खर्च पर सवाल

शनिवार, 1 अगस्त 20260 व्यूज
बस्तर पंडुम: सियासत गरमाई, कांग्रेस ने उठाए करोड़ों के खर्च पर सवाल
प्रदेश कांग्रेस ने बस्तर पंडुम जैसे पारंपरिक आयोजन पर करोड़ों के खर्च को लेकर भाजपा सरकार पर साधा निशाना। कांग्रेस का आरोप है कि आदिवासियों के विकास के बजाय राजनीतिक प्रदर्शन पर राशि खर्च की जा रही है।

रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों 'बस्तर पंडुम' आयोजन को लेकर घमासान मचा हुआ है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने रायपुर स्थित राजीव भवन में आयोजित एक प्रेस वार्ता में भाजपा सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि बस्तर पंडुम जैसी पारंपरिक आदिवासी सांस्कृतिक परंपरा को राजनीतिक कार्यक्रम में तब्दील कर दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस आयोजन पर लगभग 6 करोड़ 14 लाख 78 हजार 943 रुपये का भारी-भरकम खर्च किया गया है, जबकि यह राशि आदिवासियों के असल विकास, रोजगार, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं पर खर्च की जा सकती थी।

बैज ने राज्य सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि बस्तर के कई गांव आज भी सड़क, पुल, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। उन्होंने बोधघाट परियोजना के नाम पर 56 गांवों को उजाड़ने की तैयारी का गंभीर आरोप लगाया। इसके साथ ही, नक्सल मुक्त गांवों को एक-एक करोड़ रुपये देने के वादे और डीएमएफ (जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट) तथा सीएसआर (कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व) फंड के उपयोग को लेकर भी सरकार को घेरा।

वहीं, दूसरी ओर राज्य सरकार इस पूरे आयोजन को जनजातीय संस्कृति के सम्मान और संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बता रही है। हाल ही में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निमंत्रण पर भविष्य में बस्तर दशहरा और बस्तर पंडुम में शामिल होने की इच्छा जताई थी। राष्ट्रपति ने बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भारत की अमूल्य धरोहर बताते हुए इसके संरक्षण और व्यापक पहचान की आवश्यकता पर बल दिया था।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति द्वारा बस्तर के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात को पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण बताया था। उन्होंने कहा था कि राष्ट्रपति का बस्तर आने का निमंत्रण स्वीकार करना प्रदेश की जनजातीय संस्कृति को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण साबित होगा।

कुल मिलाकर, बस्तर पंडुम को लेकर छिड़ी यह राजनीतिक बहस अब तेज हो गई है। जहां एक ओर सरकार इसे आदिवासी गौरव और सांस्कृतिक सम्मान के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत कर रही है, वहीं कांग्रेस इसे विकास के मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने का एक प्रयास करार दे रही है। ऐसे में यह मुद्दा आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति में और अधिक चर्चा का केंद्र बनने की प्रबल संभावना है।

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