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सुपोषित छत्तीसगढ़: सेवा संकल्प अभियान से बच्चों के बेहतर भविष्य की ओर

बुधवार, 30 सितंबर 20264 व्यूज
सुपोषित छत्तीसगढ़: सेवा संकल्प अभियान से बच्चों के बेहतर भविष्य की ओर
प्रधानमंत्री के सेवा संकल्प अभियान के तहत 'आंगन मिलन उत्सव' के माध्यम से छत्तीसगढ़ के बच्चों को कुपोषण से मुक्त कर सुपोषित बनाने का प्रयास किया जा रहा है। यह पहल समाज की सामूहिक जिम्मेदारी और सम्मान की भावना को बढ़ावा देती है।

रायपुर, 29 सितंबर 2026: देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में चलाए जा रहे 'सेवा संकल्प अभियान' की भावना अब छत्तीसगढ़ के गांवों में जनभागीदारी और सेवा के माध्यम से साकार होती दिख रही है। इस अभियान की एक महत्वपूर्ण कड़ी 'आंगन मिलन उत्सव' के रूप में गांवों के आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंच चुकी है, जो बच्चों के स्वस्थ भविष्य की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह उत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि बच्चों के वर्तमान को स्वस्थ और भविष्य को उज्ज्वल बनाने के लिए समाज की सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक है।

अभियान के अंतर्गत, आंगनबाड़ी केंद्रों में 'महतारी वंदन योजना' के तहत लाभान्वित महिलाओं का सम्मान किया जा रहा है। साथ ही, बच्चों को कुपोषण के अंधकार से बाहर निकालने में दिन-रात जुटीं आशा दीदियों, मितानिनों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का भी सम्मान हो रहा है। यह पहल न केवल सेवा भाव को दर्शाती है, बल्कि इन महत्वपूर्ण कार्यकर्ताओं के प्रति सम्मान की एक नई मिसाल कायम करती है। गांव के बुजुर्गों और जन-प्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति इस उत्सव को और भी आत्मीय बना देती है। उनके हाथों से बच्चों और महिलाओं को सुपोषण और स्वस्थ जीवनशैली से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव दिए जाना, पुरानी पीढ़ी के अनुभव को नई पीढ़ी के भविष्य से जोड़ने जैसा है।

उत्सव में अन्न के दानों से बनाई गई सुपोषण की रंगोली एक अनूठी कलात्मक अभिव्यक्ति है, जो यह संदेश देती है कि घर और खेतों में उपलब्ध पौष्टिक अनाज ही स्वस्थ जीवन की मजबूत नींव है। बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम भी सुपोषण के संदेश को सहज और प्रभावी ढंग से जन-जन तक पहुंचा रहे हैं। अन्नप्राशन कार्यक्रम जहाँ नवजात शिशु के जीवन में पोषण की एक नई और पौष्टिक शुरुआत का प्रतीक है, वहीं गोद भराई का कार्यक्रम मातृत्व, मातृ स्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ी के प्रति सामाजिक दायित्वों के निर्वहन का भाव जागृत करता है।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सुपोषण केवल भोजन की उपलब्धता का विषय नहीं है, बल्कि यह माँ के स्वास्थ्य, शिशु के पोषण, परिवार में जागरूकता और पूरे समाज की सहभागिता से जुड़ा एक व्यापक संकल्प है। जब आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन, स्व-सहायता समूह की दीदियाँ, जन-प्रतिनिधि, वरिष्ठ नागरिक और पूरा ग्रामीण समुदाय मिलकर बच्चों के पोषण की चिंता करते हैं, तभी सेवा का सच्चा भाव ज़मीनी हकीकत बनता है। आज के बच्चों का स्वस्थ शरीर ही कल के विकसित छत्तीसगढ़ और एक सशक्त राष्ट्र की नींव रखेगा। इसलिए, कुपोषण के विरुद्ध जागरूकता फैलाना, मातृ-शिशु स्वास्थ्य की बेहतर देखभाल सुनिश्चित करना और सुपोषण की स्वस्थ आदतों को बढ़ावा देना, वास्तव में आने वाली पीढ़ी में किया गया सबसे महत्वपूर्ण और अमूल्य निवेश है। 'सेवा संकल्प' की यही वास्तविक तस्वीर है, जिसमें सम्मान, सहभागिता और आने वाली पीढ़ी के उज्ज्वल और स्वस्थ भविष्य का दृढ़ संकल्प समाहित है।

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