कोरबा की सड़कों पर दौड़ेगा घर-घर से जुटा प्लास्टिक कचरा

कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में ग्रामीण विकास और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। अब घरों से एकत्र किया जाने वाला प्लास्टिक कचरा जिले की ग्रामीण सड़कों का हिस्सा बनेगा। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण में जिले के लिए स्वीकृत लगभग 162 किलोमीटर लंबी 55 सड़कों के निर्माण में डामर के साथ अपशिष्ट प्लास्टिक का उपयोग किया जाएगा। इसके लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना विभाग ने 61 टन प्लास्टिक सामग्री की मांग की है।
यह पहल न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन को सुगम बनाएगी, बल्कि प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन और उसके बेहतर उपयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी प्रस्तुत करेगी। कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत ने बताया कि स्वीकृत सड़कें कोरबा, करतला, पोड़ी-उपरोड़ा और पाली विकासखंड के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में निर्मित होंगी। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत निर्मित होने वाली सड़कें ग्रामीणों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच को बेहतर बनाएंगी, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार आएगा।
स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को मिलेगा आय का अवसर
कलेक्टर श्री दुदावत ने इस पहल को ग्रामीण विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण का एक अनूठा अवसर बताया। उन्होंने कहा कि नगर निगम क्षेत्र में घर-घर कचरा संग्रहण से जुड़ी स्व-सहायता समूहों की महिलाएं इस पहल की एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं। कोरबा नगर पालिक निगम क्षेत्र में लगभग 62 हजार घरों से प्रतिदिन कचरा संग्रहण का कार्य 644 महिला सदस्य करती हैं। प्रतिदिन एकत्र होने वाले करीब 155 टन कचरे में से 4-5 टन प्लास्टिक भी शामिल रहता है। सड़क निर्माण के लिए उपयुक्त प्लास्टिक की छंटाई और आपूर्ति से इन महिलाओं के लिए आय बढ़ाने का एक नया अवसर सृजित होगा।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम कदम
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के कार्यपालन अभियंता श्री सी. एस. तंवर के अनुसार, स्वीकृत सड़कों के निर्माण के लिए लगभग 61 टन अपशिष्ट प्लास्टिक की आवश्यकता होगी। इस प्लास्टिक का उपयोग डामर के साथ किया जाएगा, जिससे डामर की खपत कुछ हद तक कम हो सकती है। यह पहल खुले में फैलने वाले प्लास्टिक कचरे को कम करने में सहायक होगी और गुणवत्ता व उपयोगिता के आधार पर प्लास्टिक को अन्य निर्माण कार्यों में भी इस्तेमाल करने की राह खोलेगी। कुल मिलाकर, यह परियोजना ग्रामीण संपर्क को मजबूत करने के साथ-साथ महिलाओं के श्रम को आर्थिक अवसर से जोड़ने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय कदम है।
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