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हाईकोर्ट के आदेश का 9 महीने बाद भी पालन नहीं, आबकारी कमिश्नर समेत दो को नोटिस

सोमवार, 5 अक्टूबर 20262 व्यूज
हाईकोर्ट के आदेश का 9 महीने बाद भी पालन नहीं, आबकारी कमिश्नर समेत दो को नोटिस
जांजगीर-चांपा के प्रधान आरक्षक मुकेश कुमार शर्मा की पदोन्नति मामले में हाईकोर्ट के आदेश का 9 महीने बाद भी पालन नहीं हुआ। कोर्ट ने आबकारी कमिश्नर समेत दो अधिकारियों को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक कामकाज की धीमी गति और अदालती आदेशों की अनदेखी का एक गंभीर मामला सामने आया है। बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक पुराने मामले में पदोन्नति से जुड़े आदेश का नौ महीने बीत जाने के बाद भी पालन न करने पर आबकारी विभाग के कमिश्नर पी.एस. एल्मा और अपर आबकारी आयुक्त पी.एल. साहू को न्यायालय अवमानना का नोटिस जारी किया है। दोनों अधिकारियों से जवाब मांगा गया है कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए।

यह पूरा मामला जांजगीर-चांपा जिले के महर्षि स्कूल रोड निवासी मुकेश कुमार शर्मा से जुड़ा है, जो आबकारी विभाग में प्रधान आरक्षक के पद पर कार्यरत हैं। आबकारी उप निरीक्षक पद के लिए आयोजित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा में उनके सर्विस रिकॉर्ड (एसीआर) के आधार पर 15 अंक कम कर दिए गए थे, जिससे वे परीक्षा में सफल नहीं हो सके। इस निर्णय से असंतुष्ट होकर उन्होंने अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय के माध्यम से बिलासपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के समक्ष यह तथ्य आया कि वर्ष 2017, 2018 और 2019 के सर्विस रिकॉर्ड में प्रतिकूल टिप्पणियां दर्ज थीं। याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि इन टिप्पणियों से पहले उन्हें कारण बताओ नोटिस देकर पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न न्याय दृष्टांतों का हवाला देते हुए इस पहलू को महत्वपूर्ण माना और निर्देश दिया कि अन्य एसीआर के आधार पर याचिकाकर्ता के मामले पर 90 दिनों के भीतर पुनः विचार किया जाए।

लेकिन, हाईकोर्ट के इस निर्देश के बावजूद निर्धारित समय सीमा में मामले पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। दिसंबर 2025 में जारी आदेश के करीब नौ महीने बाद भी जब आदेश का पालन नहीं हुआ, तो मुकेश कुमार शर्मा ने पुनः हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय के माध्यम से अवमानना याचिका दायर की। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि अधिकारियों ने अदालत के स्पष्ट निर्देश के बावजूद निर्धारित समय सीमा में कोई कार्रवाई नहीं की।

अदालत ने आदेश के पालन में हुई देरी को गंभीरता से लिया और इसी आधार पर आबकारी कमिश्नर पी.एस. एल्मा और अपर आबकारी आयुक्त पी.एल. साहू को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट यह जानना चाहता है कि आदेश का पालन न करने के लिए उनके खिलाफ न्यायालय अवमानना अधिनियम 1971 के तहत कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि ऐसे मामलों में देरी से अदालतों पर न्यायिक बोझ बढ़ता है, जिससे अन्य लंबित मामलों की सुनवाई प्रभावित होती है। अब अधिकारियों के जवाब के बाद ही हाईकोर्ट इस मामले में आगे की कार्रवाई तय करेगा।

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